Monday, 7 January 2019

एक मुलाकात

कितनी खूबसूरत शाम थी वो। विक्रम को एक अलग ही खुशी अनुभव हो रही थी आज। उसने तो कभी सपने में भी नही सोचा था कि यूँ अचानक इतने सालों बाद वो रिया से मिलेगा। और देखो वो टकराये भी तो कहाँ? उसी की बिल्डिंग की लिफ्ट में। उसे तो अभी तक लग रहा था जैसे उसने कोई खूबसूरत ख्वाब देखा हो और ऐसा लगे भी क्यूँ नही आखिर रिया कॉलेज के दिनों में सभी के लिए एक खूबसूरत ख्वाब ही तो थी।

पता नही क्यूँ रिया को अचानक सामने देखकर विक्रम को क्या हो गया कि उसके मुँह से एक शब्द नही निकला। वो तो अच्छा हुआ कि रिया ने खुद ही पहल की,"हे। यू आर विक्रम ना? डू यू रिमेंबर मी?" विक्रम के मन में ख्याल आया कि कह दूँ,"डू आई रिमेंबर यू? मैं , तुम्हे भूला ही कब था?" पर किसी तरह उसने खुद को सम्भाला और रिया की बात का जवाब दिया, मगर अपने ही ढ़ंग से। "सॉरी डू वी नो ईच अदर?" रिया ने तपाक से जवाब दिया,"अरे यार हम एक ही कॉलेज में पढ़ते थे ना।" विक्रम,"अरे तुम रिया हो ना। सॉरी पहचाना नही तुम्हे।"

बस फिर जो बातों का सिलसिला शुरू हुआ तो पता ही नही चला कि कब ग्राउंड फ्लोर आ गई और लिफ्ट का दरवाजा खुल गया। विक्रम को लगा जैसे किसी ने अचानक उसके सपनों के पंख तोड़ दिए हों। पर क्या कर सकते हैं लिफ्ट को तो रुकना ही था। अचानक उसे याद आया कि उसने रिया से ये तो पूछा ही नही कि वो यहाँ कैसे और क्यूँ मिली है उसे। तो अगले ही क्षण उसने रिया से पूछ लिया,"हे बाय दी वे, व्हाट आर यू डूइंग हियर?" और रिया भी मानो इसी सवाल की प्रतीक्षा में थी तो उसने कहा," अरे सॉरी बताना ही भूल गई। वो मैंने जॉब स्विच की है तो यहाँ नोएडा में जॉइन किया है। पर तुम यहाँ कैसे?" विक्रम ने तपाक से जवाब दिया,"मैं तो यहीं रहता हूँ, इसी बिल्डिंग के टेंथ फ्लोर पर।" रिया,"ओह, ग्रेट मैं और मेरी फैमिली एलेवेंथ फ्लोर पर शिफ़्ट हुए हैं। चलो अब तो मिलना-मिलाना होता रहेगा फिर।" विक्रम,"हाँ क्यूँ नही।"

और इस खूबसूरत मुलाकात को अपने ज़हन में बसाये विक्रम चल पड़ा अपने ऑफिस की तरफ। और सोचने लगा कि ये वक़्त भी कमाल की साज़िशें करता है। एक ज़माना था जब वो और रिया एक ही कॉलेज में थे और उनकी एक मुलाकात तक ना हो सकी कभी। और आज इतने सालों बाद एक बहुत ही खूबसूरत-सी मुलाकात जाने कहाँ से वक़्त ने उसके नसीब में डाल दी। एक छोटी पर यादगार मुलाकात।

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