Sunday, 17 May 2015

हाथों में लिए हाथ तुम्हारा


ना फ़िक्र आने वाले कल की हो,
ना चिंता मुझे अगले पल की हो।
आँखों में बस सपने हो कईं,
ज़िन्दगी लगे हर पल ही नई।
चलूँ होकर बेफ़िक्र-सी मैं,
हाथों में लिए हाथ तुम्हारा।

ना मंज़िलों से दूर होने का डर हो,
ना रास्ते में कहीं खोने का डर हो।
ज़हन में बस ख़्याल हो कईं,
ज़िन्दगी चले हर पल ही सही।
चलूँ होकर बेबाक-सी मैं,
हाथों में लिए हाथ तुम्हारा।

ना ख़ामोशी ही ख़ामोश हो,
ना तन्हाई ही बोलती हो।
दिल में बस जीने के बहाने हों कईं,
ज़िन्दगी लगे हर पल ही हसीं।
चलूँ होकर बेपरवाह-सी मैं,
हाथों में लिए हाथ तुम्हारा।

ना खौफ़ ज़माने का हो,
ना ग़म कुछ खो जाने का हो।
लबों पे बस मुस्कान हों कईं,
ज़िन्दगी रहे हर पल ही खिली।
चलूँ होकर बेख़ुद-सी मैं,
हाथों में लिए हाथ तुम्हारा।

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