Thursday, 30 April 2015

एक पहल

हम इंसानों की एक ख़ास बात ये है कि हम में से बस कुछ लोगों को छोड़ दिया जाये तो बाकी के सभी मनुष्य सफाई पसन्द होते हैं। हमें सफ़ाई इतनी पसन्द होती है कि हम अपने घर को एकदम साफ़-सुथरा रखने के लिये ये भी भूल जाते हैं कि सिर्फ़ हमारे घर को ही नही बल्कि इस पूरी धरती को ही सफ़ाई की ज़रूरत होती है। आपको अगर ज़रा भी लग रहा है कि शायद मेरे इस पोस्ट में मानव जाति पर कोई कटाक्ष आपको दिखेगा, तो बेशक़ आप सही हैं।

कभी-कभी मौका मिलता है मुझे प्यार, मोहब्बत या ज़िन्दगी जैसे विषयों से हटकर कुछ लिखने का। अब अगर ऐसा कोई मौका मेरे हाथ लगा है तो बेशक़ मैं इस मौके को बिना गवाये इसका भरपूर इस्तेमाल करना चाहूँगी। मैंने बहुत बार देखा है बहुत से ऐसे लोगों को जो अपनी सेहत को लेकर और अपने आस-पास के वातावरण को साफ़ रखने की होड़ में इतने तल्लीन हो जाते हैं कि ये तक भूल जाते हैं कि जाने-अनजाने में ही सही लेकिन वो किसी ना किस रूप में ब्रह्माण्ड के सबसे खूबसूरत ग्रह को नुक्सान पहुँचा रहे हैं। इन लोगों की साफ़-सफाई की ये इतनी अच्छी आदत कभी-कभी तो धरती के लिए इतनी बुरी सिद्ध हो जाती है की क्या कहिये। मैं ये नही कहती कि हर इंसान गलत है, लेकिन हाँ कहीं ना कहीं, किसी ना किसी से तो गलती हो ही रही है।

आखिर किस गलती की ओर ईशारा कर रही हूँ मैं? आख़िर इस पोस्ट में ऐसा क्या लिखना चाहती हूँ मैं? चलिए आपके कीमती वक़्त को बर्बाद ना करते हुए मैं मुद्दे की बात पर आती हूँ। मेरा ईशारा हम मनुष्यों की उस आदत की तरफ है जिसमें हम अपने आस-पास के वातावरण को साफ़ रखने के लिए बाकी के वातावरण की स्वच्छता की तिलांजलि दे देते हैं। बेहतर है मैं यहाँ कुछ उदाहरण आपके समक्ष रख दूँ। ताकि मेरी बात की गहराई तक आप अपनी पहुँच बना पायें।फर्ज़ कीजिये कि एक परिवार अपनी कार में किसी पहाड़ी ईलाके में घूमने गया। अच्छा है थोड़ा वक़्त परिवार के साथ बिताकर हम अपने रिश्तों को और मज़बूत कर सकते हैं। अब अगर कोई घूमने गया है, तो खूब मस्ती भी होगी, और उस मस्ती में आप अपने कुछ सामान को उन पहाड़ों में ही भूल सकते हैं। वो सामान जिसे उसके गंतव्य तक पहुँचाना आपकी जिम्मेदारी थी, परंतु आपने ऐसा किया नही। मैं किस सामान की बात कर रही हूँ? क्या इस सवाल ने आपके दिमाग में दस्तक दी? जी हाँ मैं बात कर रही हूँ इस सारे कूड़े-कचरे की जो आप अपने पीछे छोड़ आये हैं। चिप्स के पैकेट, बचा हुआ खाना, पानी की बोतल और भी ना जाने क्या-क्या। क्या आपको नही लगता कि आपको उस सारे सामान को कूड़ेदान में डालना चाहिए था। बेशक, आपको करना तो यही चाहिये था। पर ऐसा किया तो नही आपने।

ये सिर्फ हमारी ढ़ेर सारी गलतियों में से एक नमूना था। ऐसे बहुत से नमूने हमारी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में आप देख सकते हैं। जैसे घर का कूड़ा सड़क पर डाल देना, खाने-पीने की चीज़ों के लिफ़ाफ़ों या पैकेट को यहाँ-वहाँ फैंक देना, कूड़ेदान को देख कर भी अनदेखा कर देना, शौचालय बने होने के बावज़ूद खुले में ही शौच में चले जाना, और ना जाने क्या-क्या। ये सभी ऐसे उदाहरण है जो कोई भी आम इंसान आपके समक्ष रख सकता है और कोई भी आम इंसान इनकी मिसाल हो सकता है। बात ये नही है कि हम कौन-कौन सी गलतियाँ कर चुके हैं। बात यहाँ ये है कि आख़िर इन गलतियों से हम कोई सबक क्यूँ नही ले रहे हैं?

मैंने बहुत बार सुना है कि अकेला चना भाड़ फोड़ सकता है। वैसे ऐसा तो आज तक सुना ही है मैंने। लेकिन हाँ मानती हूँ कि अगर कोई ठान ले कि उसे किसी गलत बात को सही करना है तो बेशक वो सफल हो सकता है। आपको लगेगा कि मैं इतना कुछ लिख गई हूँ तो क्या कुछ किया भी है मैंने या यूँ ही डींगें हाँक दी हैं इतनी और खुद के दामन को पाक-साफ़ रख, सारी ही मानव  जाति को गलत ठहरा दिया है। तो साहब मैं आपको बता देना चाहूँगी कि मैं पिछले कई वर्षों से इस कोशिश में हूँ कि इस धरती को साफ़ सुथरा रखने में अपनी थोड़ी-सी भूमिका को मैं बखूबी निभाऊँ। और इसके लिए मैं सिर्फ इतना ही करती हूँ कि जहाँ तक हो सके कूड़े को कूड़ेदान में ही डालती हूँ, अगर कूड़ादान ना दिखे तो खाई हुई चीज़ों के पैकेट को अपने बैग में डाल लेती हूँ और घर आकर उन्हें कूड़ेदान तक पहुँचा देती हूँ। मैं बेवजह चलते नल को बंद कर देती हूँ। हमेशा बिजली को ज़रूरत पड़ने पर ही प्रयोग में लाती हूँ। आपको लगेगा इसमें क्या बड़ी बात है।
पर मैं सिर्फ इतना ही लिखूँगी,"एक-एक बूँद जुड़ती है, तभी सागर बनता है...!"

आप मानें या ना मानें, लेकिन पहल ज़रूरी है। बस आप एक बार पहल करके देखिये, तस्वीर सिर्फ बदलेगी ही नही, बल्कि और खूबसूरत भी हो जायेगी।

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2 comments:

  1. HAM BADLEGE YUJ BADLEGA.. UTTAM WICHAR

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    1. "शुक्रिया अरुण Sir...!" :-)

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