तुझसे पहले भी जी ही रहे थे,
ज़िन्दा तेरे बाद भी हैं।
तेरे आने से पहले भी थे अकेले,
तन्हा तो हम आज भी हैं।
हम ना ख़ास तेरे आने से पहले ही थे,
अभी भी तो आम ही हैं।
आँखें तेरे इंतज़ार में कल भी थीं,
आज भी ये बेकरार ही हैं।
एहसास पहले भी हुआ करते थे,
ज़ज़्बात दिल में कहीं आज भी हैं।
धड़कता था दिल पहले भी सीने में,
धड़कनें अब भी बजाती साज़ ही हैं।
ख़्याल बिखरे रहते थे कल भी मेरे,
सजे वो आँखों में बनके ख़्वाब ही हैं।
बहुत अलग थे हम तेरे आने से पहले,
बहुत अलग तेरे जाने के बाद भी हैं।
Friday, 23 January 2015
ज़िन्दा तेरे बाद भी हैं...
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
लिखने बैठे...तो सोचा...
लिखने बैठे, तो सोचा, यूँ लिख तो और भी लेते हैं, ऐसा हम क्या खास लिखेंगे? कुछ लोगों को तो ये भी लगेगा, कि क्या ही होगा हमसे भला, हम फिर कोई ब...
-
कभी-कभी आगे बढ़ते हुए जब अचानक पीछे मुड़ कर देखते हैं तो ख़्याल आता है कि काश उस वक़्त ये ना हो कर वो हो गया होता तो शायद आज तस्वीर कुछ अलग होती...
-
कहते हैं जननी से धन्य ना कोई हो सका है और ना ही कभी होगा। एक माँ जो अपने बच्चे को अपने ही रक्त से सींचती है, उसे अपने ही शरीर का हिस्सा देक...
-
These days internet is loaded with a lot of pages containing a detailed information about E Governance i.e. Electronic Governance. An...
No comments:
Post a Comment